'क्रॉस वोटिंग का कोई खतरा नहीं'
लॉकडाउन के ठीक पहले 25 मार्च को जब उनकी पार्टी भाजपा ने कांग्रेस का तख्ता पलटा तब से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ढाई महीने का कार्यकाल कई घटनाओं का गवाह बना. राहुल नरोन्हा से उनकी बातचीत के अंश:
प्रतीकात्मक तस्वीर — डेमो साइट
चुनौतियां नेतृत्व को निखारती हैं. मेरे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से पहले कोरोना का संक्रमण इंदौर में फैल चुका था और इससे निपटने के कोई इंतजाम नहीं किए गए थे. राज्य की वित्त व्यवस्था भी चौपट हो गई थी. इन 75 दिनों में मैंने प्रदेश को इस दलदल से निकालने की कोशिश की. अभी वायरस पर नियंत्रण है, सक्रिय मामले कम हुए हैं, हालात को निचले स्तर तक दुरुस्त करने में हमें लॉकडाउन से मदद मिली. निसर्ग तूफान के कारण प्रदेश में काफी वर्षा हुई, हमारे समक्ष उस 1.26 करोड़ टन गेहूं को बचाने की चुनौती थी जिसे हमने खरीदी है. हर तरह की चुनौतियां आईं पर हम मुकाबले में सफल रहे.
हम दोनों चीजों के लिए रास्ते निकालेंगे, संसाधन बढ़ाएंगे और योजनाएं जारी रहेंगी. राजस्व के नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं. बजट की सीमा है और हमें सार्वजनिक कार्यों के लिए इसके बाहर संसाधन ढूंढने होंगे. केंद्र ने उधार लेने की सीमा को बढ़ाया है पर इसे आर्थिक सुधारों से जोड़ दिया है. मैंने सत्ता संभाली तो मुझे कहा गया कि खजाना खाली है, पर हमने छात्रों, महिलाओं और प्रवासी मजदूरों के मामलों पर 26,000 करोड़ रुपए खर्च किए. रोजगार देने के लिए हमें इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी खर्च करना होगा.
पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा 24 मार्च को हुई, मध्य प्रदेश में भी इसकी घोषणा उसी दिन हुई. इसके लिए कोई अलग से तारीख नहीं तय हुई थी. मध्य प्रदेश की समस्या यह है कि इसके लिए दो महीने पहले जो तैयारी हो जानी चाहिए थी, वह नहीं हुई.
राज्य में कोविड संक्रमण फैलने के बाद हमने तय किया कि मंत्रिमंडल विस्तार पर कोई जल्दबाजी न दिखाई जाए. 23 मार्च की शाम को मुझसे यही कहा गया था कि लॉकडाउन लागू हो रहा है इसलिए मैं शपथ ग्रहण कर लूं. यह पार्टी तय करेगी और विस्तार जल्द ही होगा. केंद्रीय नेतृत्व ने मुझसे कहा है कि एक दौर की बातचीत के बाद विस्तार होगा. भाजपा में हर कोई पार्टी के समर्पित है, राज्यसभा चुनाव को लेकर कोई खतरा नहीं है.
चुनाव भाजपा के नाम पर होंगे. सिंधिया जी लोकप्रिय नेता हैं. उनके आने का हमें लाभ मिलेगा. जहां तक भविष्य की बात है तो भाजपा में व्यक्ति तय नहीं करते कि वे क्या भूमिका निभाएंगे, यह संगठन तय करता है.